**मिथिलाक बात** बनल अष्टदल अड़िपन आँगन, माछ, मखान, पान अछि प्रचलित। चरण छूबि आशीश लैत छैथ, जतय बृद्ध केँ एखनहुँ धरि नित।

शनिवार, 18 अप्रैल 2009

ध्यान
बहुत कठिन अछि प्र्रसन , कहब जीवन छै क्र्रंदन।
भेटत किछु प्रतिदान जेना करबै अभिनंदन।
जतेक पानि पड़तै, गाछो सब ओहिना बढ़तै।
भेटतै रौद ससरि क॔ लत्ताी फत्ताी चढ़तै।
करबै जतेक संकुचित मोनक अपन सोच के।
करत ग्रसित ओतबे दुख पीड़ा अपन सोच के।
उठत डेग जे कर्म करब ओहिना फल भेटत।

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मिथिलाक बात मिथिलाक पवित्र भूमि मधुबनी सँ प्रकाशित